प्यारे बच्चों

कल सपने में देखा -मैं एक छोटी सी बच्ची बन गई हूं । तुम सब मेरा जन्मदिन मनाने आये हो । चारों ओर खुशियाँ बिखर पड़ी हैं ,टॉफियों की बरसात हो रही है । सुबह होते ही तुम में से कोई नहीं दिखाई दिया ।मुझे तो तुम्हारी याद सताने लगी ।

तुमसे मिलने के लिए मैंने बाल कुञ्ज के दरवाजे हमेशा के लिए खोल दिये हैं। यहाँ की सैर करते समय तुम्हारी मुलाकात खट्टी -मीठी ,नाटी -मोती ,बड़की -सयानी कहानियों से होगी । कभी तुम खिलखिला पड़ोगे , कभी कल्पना में उड़ते -उड़ते चन्द्रमा से टकरा जाओगे .कुछ की सुगंध से तुम अच्छे बच्चे बन जाओगे ।

जो कहानी तुम्हें अच्छी लगे उसे दूसरों को सुनाना मत भूलना और हाँ ---मुझे भी वह जरूर बताना ।
इन्तजार रहेगा ----! भूलना मत - -

सोमवार, 5 दिसंबर 2016

तीसरी ई बुक -बालोपयोगी लोक कथाएँ


गंगे-यमुने 




 आवरण पृष्ठ के ऊपर लिखे 'गंगे यमुने'के ऊपर क्लिक करने से आप ई बुक पढ़ सकेंगे। 
आज ही यह पुस्तक प्रकाशित हुई है।बालोपयोगी लोककथाओं का प्रतिनिधित्व करती हुई इसकी कहानियाँ - गुणों का खजाना हैं। इनमें मनोरंजन का पुट तो है ही साथ में दया,दोस्ती ,सच्ची,ईमानदारी और मेहनत की कमाई जैसे  जीवन के मूल्यों को सिखाने के लिए दिन रात पंखों पर सवार हो ज्ञान बांटती दिखाई देती हैं।जिससे बच्चों का चरित्र गठन तो होता ही हैं साथ ही हम अपनी परम्पराओं और संस्कृति से जुड़े रहते हैं।

गंगे यमुने बाल पुस्तक में कुल मिलाकर 89 पृष्ठ हैं। जिनपर 20 कहानियाँ अंकित हैं। मुख्य आवरण का चित्रांकन खुद लेखिका ने किया है। मेरा आग्रह है इसका अवलोकन कर अवश्य ही अपने अमूल्य विचारों से अवगत कराएं।  

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (07-12-2016) को "दुनियादारी जाम हो गई" (चर्चा अंक-2549) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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