प्यारे बच्चों

कल सपने में देखा -मैं एक छोटी सी बच्ची बन गई हूं । तुम सब मेरा जन्मदिन मनाने आये हो । चारों ओर खुशियाँ बिखर पड़ी हैं ,टॉफियों की बरसात हो रही है । सुबह होते ही तुम में से कोई नहीं दिखाई दिया ।मुझे तो तुम्हारी याद सताने लगी ।

तुमसे मिलने के लिए मैंने बाल कुञ्ज के दरवाजे हमेशा के लिए खोल दिये हैं। यहाँ की सैर करते समय तुम्हारी मुलाकात खट्टी -मीठी ,नाटी -मोती ,बड़की -सयानी कहानियों से होगी । कभी तुम खिलखिला पड़ोगे , कभी कल्पना में उड़ते -उड़ते चन्द्रमा से टकरा जाओगे .कुछ की सुगंध से तुम अच्छे बच्चे बन जाओगे ।

जो कहानी तुम्हें अच्छी लगे उसे दूसरों को सुनाना मत भूलना और हाँ ---मुझे भी वह जरूर बताना ।
इन्तजार रहेगा ----! भूलना मत - -

रविवार, 22 जनवरी 2017

चौथी ई बुक




सुधा भार्गव 



अभी हाल में जनवरी 2007 में मेरी यह ई बुक प्रकाशित हुई है।  इसमें बालोपयोगी 26 छोटी छोटी कथायें  हैं. इन कथाओं का आधार प्राचीन जातक लघुकथाएं ही है।  इनका सरल भाषा में पुनर्लेखन  किया गया है।
 ऑन  लाइन पर इसके 70 पेज सरलता से पढ़े जा सकते हैं. लिंक है-

/pothi.com/pothi/book/ebook-सुधा-भार्गव-हडप्पा-कडप्पा
इसके बारे में अपने विचार अवश्य बताइयेगा.


4 टिप्‍पणियां:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, "कैंची, कतरन और कला: रविवासरीय ब्लॉग-बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  2. bahut-bahut badhai, aapki har baal rachnaen bachchon ko bhaati hain.ummeed karta hoon ki bachche sadaiv aapki rachnaon ka intjaar karte honge.
    ashok andre

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