प्यारे बच्चों

कल सपने में देखा -मैं एक छोटी सी बच्ची बन गई हूं । तुम सब मेरा जन्मदिन मनाने आये हो । चारों ओर खुशियाँ बिखर पड़ी हैं ,टॉफियों की बरसात हो रही है । सुबह होते ही तुम में से कोई नहीं दिखाई दिया ।मुझे तो तुम्हारी याद सताने लगी ।

तुमसे मिलने के लिए मैंने बाल कुञ्ज के दरवाजे हमेशा के लिए खोल दिये हैं। यहाँ की सैर करते समय तुम्हारी मुलाकात खट्टी -मीठी ,नाटी -मोती ,बड़की -सयानी कहानियों से होगी । कभी तुम खिलखिला पड़ोगे , कभी कल्पना में उड़ते -उड़ते चन्द्रमा से टकरा जाओगे .कुछ की सुगंध से तुम अच्छे बच्चे बन जाओगे ।

जो कहानी तुम्हें अच्छी लगे उसे दूसरों को सुनाना मत भूलना और हाँ ---मुझे भी वह जरूर बताना ।
इन्तजार रहेगा ----! भूलना मत - -

रविवार, 5 मार्च 2017

पाँचवी ई बुक


                                 बदलते रंग 
                                              सुधा भार्गव 

ई बुक 

फरवरी 2017 में मेरी  नई ई बुक प्रकाशित हो चुकी है। इसमें बालकों के लिए छोटी -छोटी  प्राचीन कथाओं को  दुबारा लिख उनका नवीनीकरण किया है। एक तरह से 'बदलते रंग'  कथाओं का तीसरा भाग है।  इनका  आधार  नैतिकता ,मनोरंजन व संस्कारों का बीजारोपण करना तो है ही। साथ ही बच्चों को  भविष्य के लिए तैयार करना है ताकि बड़े होने पर वे  जीवन मे आने वाली मुश्किलों का सामना सरलता से कर सकें।

ऑन लाइन पर इसके 60 पेज पुस्तक के शीर्षक पर क्लिक करते ही पढ़े जा सकते हैं। लिंक है-
https://pothi.com/pothi/book/ebook-sudha-bhargava-badalte-rang
पढ़कर अपने अमूल्य विचार अवश्य दें।


1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा आज मंगलवार (07-03-2017) को

    "आई बसन्त-बहार" (चर्चा अंक-2602)

    पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं