प्यारे बच्चों

कल सपने में देखा -मैं एक छोटी सी बच्ची बन गई हूं । तुम सब मेरा जन्मदिन मनाने आये हो । चारों ओर खुशियाँ बिखर पड़ी हैं ,टॉफियों की बरसात हो रही है । सुबह होते ही तुम में से कोई नहीं दिखाई दिया ।मुझे तो तुम्हारी याद सताने लगी ।

तुमसे मिलने के लिए मैंने बाल कुञ्ज के दरवाजे हमेशा के लिए खोल दिये हैं। यहाँ की सैर करते समय तुम्हारी मुलाकात खट्टी -मीठी ,नाटी -मोती ,बड़की -सयानी कहानियों से होगी । कभी तुम खिलखिला पड़ोगे , कभी कल्पना में उड़ते -उड़ते चन्द्रमा से टकरा जाओगे .कुछ की सुगंध से तुम अच्छे बच्चे बन जाओगे ।

जो कहानी तुम्हें अच्छी लगे उसे दूसरों को सुनाना मत भूलना और हाँ ---मुझे भी वह जरूर बताना ।
इन्तजार रहेगा ----! भूलना मत - -

शनिवार, 29 अप्रैल 2017

7वीं ई-बुक


                                                            
पशु -पक्षियों का संसार 
ई-बुक 
प्रकाशित -अप्रैल                                               सुधा भार्गव 
                                                                         





       इस पुस्तक में 12 कहानियाँ हैं और केवल 66पृष्ठ हैं। मगर इसकी समस्त कहानियाँ पशु-पक्षियों के अद्भुत संसार से जुड़ी हैं । जो हमेशा बच्चों के लिए कौतूहल का विषय रहा है।  वे उनसे बहुत कुछ सीखते भी हैं। यही सोचकर इन कहानियों का सृजन किया है। 
पुस्तक 'फूलों का राजा' पर  क्लिक करते ही आप ई-बुक पर पहुँच जाएँगे और 6-7 कहानियाँ चुटकी बजाते ही घर बैठे सहज में पढ़ सकेंगे। तो क्लिक कीजिए और कहानियों का आनंद लीजिए। 


1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (30-04-2017) को
    "आस अभी ज़िंदा है" (चर्चा अंक-2625)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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