प्यारे बच्चों

कल सपने में देखा -मैं एक छोटी सी बच्ची बन गई हूं । तुम सब मेरा जन्मदिन मनाने आये हो । चारों ओर खुशियाँ बिखर पड़ी हैं ,टॉफियों की बरसात हो रही है । सुबह होते ही तुम में से कोई नहीं दिखाई दिया ।मुझे तो तुम्हारी याद सताने लगी ।

तुमसे मिलने के लिए मैंने बाल कुञ्ज के दरवाजे हमेशा के लिए खोल दिये हैं। यहाँ की सैर करते समय तुम्हारी मुलाकात खट्टी -मीठी ,नाटी -मोती ,बड़की -सयानी कहानियों से होगी । कभी तुम खिलखिला पड़ोगे , कभी कल्पना में उड़ते -उड़ते चन्द्रमा से टकरा जाओगे .कुछ की सुगंध से तुम अच्छे बच्चे बन जाओगे ।

जो कहानी तुम्हें अच्छी लगे उसे दूसरों को सुनाना मत भूलना और हाँ ---मुझे भी वह जरूर बताना ।
इन्तजार रहेगा ----! भूलना मत - -

रविवार, 28 मार्च 2021

उत्सवों का आकाश

बच्चों,

 होली की शुभकामनायें । हम पिछले साल की तरह होली नहीं खेल पा रहे हैं । क्या से क्या हो गया । पर पलाश मुस्कुरा रहा है। क्यों?कारण जानने के लिए पूरी कहानी खंगालनी पड़ेगी। पसंद आए तो तुम भी उसकी तरह मुस्करा देना --बस एक बार ।


पलाश मुस्कराया
सुधा भार्गव



पलाश हरे चमकदार पत्तों से घिरा,केसरिया फूलों से लदा मुस्करा रहा था। इंतजार कर रहा था - होली आए । उसे आशा थी पिछले साल की तरह खरगोशिया,भालू हाथी बिल्लो सब होली मनाने उसके पास आएंगे । मेरे फूलों के रंग से एक दूसरे को भिगोएंगे। बेचारा इंतजार ही करता रह गया। होली के दिन भी कोई उसके पास आकर न फटका। वह बुझा बुझा सा हो गया।
सुबह हवा मस्तानी चाल से बह रही थी कि पलाश की सुंदरता को देख हठात रुक गई। आँखें मिचमिचाती बोली -"अरे पलाश तू तो बड़ा सुंदर लग रहा है । क्या चटक रंग है फूलों का। पर तू कुछ उदास है। "
" हाँ हवा बहन !मुझे पिछली होली की याद सता रही है। कितने ही दोस्त जब मेरे फूलों के पानी से भीग भीगकर खिलखिलाए थे,जंगल में खुशियों का अच्छा खासा दंगल हो गया था। पर आज तो सुबह से किसी ने मेरी सुध ही नहीं ली है।"
"अरे भोले पलाश तुझे पता नहीं कोरोना राक्षसनी दुबारा आ गई है । पहले तो जैसे तैसे उसे भगा सा ही दिया था। इससे उसे गुस्सा चढ़ आया । इस बार तो बड़े ज़ोर से फुफकार रही है। जो उसकी पकड़ में आ गया उसके पेट में दर्द और उल्टियाँ भी चालू हो जाती हैं।"
"यह तो बड़ा बुरा हुआ। !लगता है पशुपक्षियों को भी मास्क लगाने पड़ेंगे।"
"मास्क तो लगाने शुरू कर दिये। मैं जब आ रही थी भालू, हिरनी और लंगूर को मास्क लगाए देखा था।"
"ये मास्क किसने बनाए?"पलाश ने हैरानी से पूछा।
"अरे वो दरजिन चिड़ियाँ हैं न । वे सब मिलकर पत्तों से मास्क बना रही है। कुछ चिड़ियाँ अपनी चोंच में दबाकर मास्क पेड़ों पर और गुफाओं के आगे गिरा आती है।"
"यह तो बड़े भले का काम है। काश मेरे भी पैर होते तो मुसीबत के समय किसी के काम आता ।''
"अरे दुखी क्यों होता है । मुझे बता न । शायद मैं कर सकूँ।"
"हवा बहन ,नन्हें खरगोशीया,हाथी, भालू को पिछली होली याद तो आ रही होगी । मैं चाहता हूँ उनके पास मेरे फूल पहुँच जाएँ । उफ मेरा दिमाग भी खराब हो गया है। फूल कैसे उन तक उड़कर जा सकते हैं। "
"अरे मैं हूँ न । चुटकी में उन तक तेरे फूल पहुंचा दूँगी। अब थोड़ा मुस्कुरा दे। तेरी रोनी सूरत अच्छी नहीं लगती।"
पलाश ने जबर्दस्ती हंसने की कोशिश की। बड़े जोश से हवा पूरी शक्ति लगाकर बहने लगी। तेज हवा के झोंकों से पलाश की डंडियाँ भी ज़ोर से हिलने लगीं । एक दूसरे से टक टक करती लग रही थी मानो गले मिल रही हों। इस टकराव में फूल झर झर झरने लगे। देखते ही देखते जमीन पर फूलों का ढेर लग गया। अब हवा ने गोलाई में चक्कर लगाना शुरू किया । उसके साथ- साथ फूल भी चक्कर काटने लगे। अचानक हवा ने रुख बदला और सीधी बहने लगी । फूल भी एक कतार में जमीन पर लुढ़कते हुये हवा का पीछा करने लगे। । आगे आगे हवा पीछे पीछे हँसते खिलखिलाते फूल । जो भी देखता हैरत से देखता रह जाता और कहता-लो भैया अब तो फूल भी चलने लगे। पलाश भी हवा की करामात देख पुलकित हो उठता ।
हवा झटके से भालू के घर से टकराई। भालू ने घबराकर दरवाजा खोला -''कोरोना के समय कौन मुझसे मिलने आ गया !"
दरवाजे पर फूलों को देख भौचक्का सा रह गया। भागा भागा एक टोकरी लाया । उसमें पलाश के फूल भरने लगा। भरी टोकरी देख हवा वहाँ से चल दी। बोली-
पलाश ने बड़े प्यार से
फूल तुम्हें भेजे हैं
होली का रंग जमाना
याद उसे कर लेना
उसके पीछे बाकी के फूल भी उड़ चले। अब भालू की समझ में आया फूलों का राज । वह चिल्लाया -"हवा बहन पलाश से कहना मैं उसे बहुत याद करता हूँ।"
पलाश के सारे दोस्तों को फूल बांटती हवा उसके पास पहुंची और इतराते बोली -"देखा मैंने कितनी जल्दी फूल पहुंचा दिये।"
" हाँ बहन ,बहुत बहुत धन्यवाद । पर एक बात बता ''मेरे दोस्त कैसे है?उन्हें देखने को तो मेरी आँखें तरस गईं। "
'अरे बहुत खुश हैं बहुत खुश ,फूल पाकर तो उनकी आँखें चमक उठीं। तेरी बहुत याद कर रहे थे।"
"सच में। मैं भी तो उन्हें बहुत प्यार करता हूँ। "
"वह तो दिखाई दे ही रहा है । तभी तो तूने उन्हें अपने केसरिया फूल भेजे।"
"कुछ भी कह । पर तेरे बिना मेरा यह काम नहीं होता। "
"तू जब भी कहेगा मैं हाजिर हो जाऊँगी । पर अब रुका नहीं जा रहा। मैं ठहरी चंचल !और --और --। .

"बहना -इठलाना मेरा काम।" हँसते हुये पलाश ने उसकी बात पूरी की।
तेजी से हवा सरसराती फर्र-फर्र उड़ चली।
समाप्त
28.3.2021

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