प्यारे बच्चों

कल सपने में देखा -मैं एक छोटी सी बच्ची बन गई हूं । तुम सब मेरा जन्मदिन मनाने आये हो । चारों ओर खुशियाँ बिखर पड़ी हैं ,टॉफियों की बरसात हो रही है । सुबह होते ही तुम में से कोई नहीं दिखाई दिया ।मुझे तो तुम्हारी याद सताने लगी ।

तुमसे मिलने के लिए मैंने बाल कुञ्ज के दरवाजे हमेशा के लिए खोल दिये हैं। यहाँ की सैर करते समय तुम्हारी मुलाकात खट्टी -मीठी ,नाटी -मोती ,बड़की -सयानी कहानियों से होगी । कभी तुम खिलखिला पड़ोगे , कभी कल्पना में उड़ते -उड़ते चन्द्रमा से टकरा जाओगे .कुछ की सुगंध से तुम अच्छे बच्चे बन जाओगे ।

जो कहानी तुम्हें अच्छी लगे उसे दूसरों को सुनाना मत भूलना और हाँ ---मुझे भी वह जरूर बताना ।
इन्तजार रहेगा ----! भूलना मत - -

बुधवार, 4 मई 2011

नई कहानी --गरीब का भाई




मई मास 
की
 नई नवेली कहानी 

सुनो कहानी एक नई
मई मास में डाली डाली
झूल रहे, हरे  -रसीले
पीले -पीले आम ।

लाल -लाल गालों वाले                 
छोटे -छोटे  हाथ उठाकर
तुम्हें बुलाते प्यारे  बच्चों 
दोड़ो -आओ,खाओ आम।

तेज हवा के झोंकों से
टप से गिर गये आम
जल्दी उठाओ ,पानी से धोलो
मीठे मिश्री से आम।

चूस -चूस कर गुठली फेंको
उनको सुलाओ माटी में
उग आएगा आम का पौधा
सुन्दर सा सुकुमार।


गरीब फुलवा ने ऐसा ही किया । उसकी माँ को एक दिन  एक आम मिल गया ।      देखते  ही देखते वह उस पर पिल पड़ा । स्वाद ले- ले कर उसे चूसने लगा और गुठली  लापरवाही से झोंपड़ी के आगे डाल दी ।

दूसरे दिन सुबह  सोकर उठा और गुठली देखने बाहर आया पर उसे कहीं न दिखाई दी । असल में रात में पानी बरसने के कारण गुठली मिट्टी में दब गयी थी ।
कुछ दिनों बाद उसने फिर गुठली खोजी ,वह तो नहीं मिली पर उसकी जगह कोमल -कोमल पत्तों वाला नन्हा सा पौधा खड़ा मिला।
उसे देखकर वह मुस्करा दिया  और बोला --पौधे भाई ---पौधे भाई --घर के बाहर क्यों खड़े हो।चलो मेरे साथ अन्दर, मैं तुम्हारे साथ खेलूंगा ।

-
धीरे से उठाना वरना मुझे चोट लग जायेगी ।धीमी आवाज आई।

-
तुम मेरे भाई हो। तुम्हें  सावधानी से अन्दर ले जाकर एक गमले में रख दूँगा।

-थोड़े दिनों में मैं बड़ा हो जाऊँगा --गमला तो फिर मेरे लिए छोटा पड़ जायेगा |पौधा कमर मटकाकर बोला ।
-
फिर मैं क्या करूँ ----
-
तुमने मुझे अपना भाई बनाया है सो तुम्हारे साथ ही रहना पसंद करूंगा लेकिन घर के अन्दर नहीं ---बाहर।
-
क्यों ?
-
बड़े  होने पर मेरी जड़ें नीचे गहराई तक चली जायेंगी ।लम्बाई-मोटाई में तुमसे बड़ा हो जाऊंगा । तबतो तुम्हारा आँगन भी छोटा पड़ने लगेगा।
फुलवा सिर खुजलाते हुए बोला --कह तो ठीक रहे हो पर तुम्हारे साथ रहूँगा कैसे !
-
तुम रोज मेरे पास सुबह -शाम आना ,मेरी देखभाल करना मुझे पानी और खाद की भी जरूरत होगी ।
-
क्यों ?
-
जिस तरह तुम्हें भूख -प्यास लगती है उसी तरह मुझे भी लगती है ।
-
्तुम्हारा साथ मुझे बहुत अच्छा लगता  है ।  तुमसे मिलने सुबह -शाम जरूर आऊँगा ।
फुलवा की देखरेख में पौधा बड़ा होने लगा  ।फल -फूल और पत्तों से भरपूर आम का पौधा एक बड़ा पेड़ बन गया 

अब फुलवा उसकी देखभाल नहीं करता था बल्कि पेड़ फुलवा का ध्यान रखता था ।

फुलवा और उसकी माँ खूब आम खाते। जो बचते वे ग़रीब बच्चों में बाँट दिये जाते ताकि कोई आम के लिए न तरसे ।
एक दिन फुलवा बोला -पेड़ भाई .मैं तो  बहुत पढ़ना चाहता हूं पर इसके लिए पैसा नहीं है ।
-
पैसा !पैसा तो तुम कमा सकते हो ।
-
मैं --मैं तो बहुत छोटा हूं।
-
छोटे नहीं--- अब बड़ी हो गये हो  । टोकरी में आम भरकर बाजार में बेच आओ। बस आ जायेगा पैसा  ।निकल आएगा फीस -किताब का खर्चा।
-
तब तो मैं माँ को काम भी नहीं करने दूँगा । देख  लेना---  घर में रानी बनाकर रखूँगा उसे ।
-
बस देखने शुरू कर दिये सपने । सपने सच करने के लिए कुछ करना भी पड़ता है  । पहले आम बेचने तो जाओ ।


बड़े -बड़े रसीले आम देख खरीदारों ने फटाफट खरीद लिए ।पहली बार उसकी जेब में सिक्के खन -खन कर रहे थे।उनकी आवाज सुनकर वह हवा में उडा जा रहा था

पेड़ भाई को उसने फूलों की माला पहनाई और कहा --तुम्हारे कारण ही मेरी   जेब में सौ रूपये  हैं  । यह मै कभी भूल नहीं सकता ।
घर में वह फुर्ती से गया और चिल्लाया --
-
माँ --माँ  --देखो तो --आम बेचकर मैं बहुत से रूपये लाया हूं ।
चकित होकर माँ अपने बेटे पर प्यार ही प्यार उड़ेलने लगी  । लेकिन वह अपने दूसरे बेटे को नहीं भूली । रोली चावल लेकर बाहर आई  । आम के पेड़ को तिलक लगाया ।
बोली --फुलवा ,अब वायदा करो कि पेड़ भाई की हमेशा रक्षा करोगे ।.वह हमारी भलाई करने वाला है।उसे काटकर -,तोड़कर कष्ट न पहुँचाना ।



माँ --मैं सब समय तुम्हारी बात याद रखूँगा  ।फुलवा ने अपने पेड़ भाई पर स्नेह से हाथ फेरा।
इतनी अच्छी माँ और भाई को पाकर पेड़ भाई  तो खुशी से झूम उठा । ऐसा झूमा -----   डालियाँ भी नाच उठीं । लाल.हरे -पीले -आम दोनों के चारों ओर बिछ गये।
कह रहे थे ---
प्यार के झोंकों से
टप से गिरे  हम                              v
लपलप  -लपलप                                       
भागम भाग -भाग
 

चूसो -खाओ आम
                     

भाग -भाग -भाग


आम
हमारा राष्ट्रीय फल 
देवताओं का प्रिय भोजन
कवि कालीदास ने इसकी प्रशंसा में गीत गाये
ग्रीक राजा एलेक्जेंडर द ग्रेट और चीनी यात्री ह्येन त्सेंग (Hieun tsang)को यह फल बहुत स्वादिष्ट लगा
मुसलमान बादशाह अकबर ने दरभंगा (बिहार )में १००,०००आम के जहाँ  पेड़
लगवाये वह था लक्खी बाग़। 








7 टिप्‍पणियां:

  1. हमने भी इसे बच्‍चा बनकर पढ़ा।

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  2. waah ekdam anuthi rachna
    sabkuchh hai jaankaree bhi rochakta bhi aur masumiyat bhi.

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  3. सचमुच सुन्दर ब्लाग,बच्चो को लेकर हिन्दी मे नेट पर बहुत कम सामग्री है। आपको बधाई।
    आप चाहे तो मेरे ब्लाग पर भी इसका लिंक डाल सकती हैं-nishaktbachche.blogspot.com

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  4. 'बालकुंज' में प्रकाशित आपकी रचनाएँ बचपन में पहुँचा देने का सत्कार्य करती हैं। आपने आम के बहाने सभी फलदार पेड़ों से आदमी के आत्मीय रिश्ते की कहानी लिखी है।

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  5. कहानी आम के पके फल सी ही रसीली है ।शिक्षाप्रद तो है ही ।

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