प्यारे बच्चों

कल सपने में देखा -मैं एक छोटी सी बच्ची बन गई हूं । तुम सब मेरा जन्मदिन मनाने आये हो । चारों ओर खुशियाँ बिखर पड़ी हैं ,टॉफियों की बरसात हो रही है । सुबह होते ही तुम में से कोई नहीं दिखाई दिया ।मुझे तो तुम्हारी याद सताने लगी ।

तुमसे मिलने के लिए मैंने बाल कुञ्ज के दरवाजे हमेशा के लिए खोल दिये हैं। यहाँ की सैर करते समय तुम्हारी मुलाकात खट्टी -मीठी ,नाटी -मोती ,बड़की -सयानी कहानियों से होगी । कभी तुम खिलखिला पड़ोगे , कभी कल्पना में उड़ते -उड़ते चन्द्रमा से टकरा जाओगे .कुछ की सुगंध से तुम अच्छे बच्चे बन जाओगे ।

जो कहानी तुम्हें अच्छी लगे उसे दूसरों को सुनाना मत भूलना और हाँ ---मुझे भी वह जरूर बताना ।
इन्तजार रहेगा ----! भूलना मत - -

सोमवार, 26 दिसंबर 2011

नया साल -- नई कहानी

नए वर्ष की चहल -पहल




                                                                                 





नए साल में  बच्चों की दुनिया में बच्चों का और बड़ों का स्वागत हैI हम इसमें पूरे एक  वर्ष रहेंगे I न कोई डर होगा न कोई चिंता I बस हँसेंगे -हंसाएंगे प्रीत   के फूल खिलाएंगे I.अपने हिस्से की रोटी दूसरों को खिलाएंगे I जिसका कोई न होगा उसके हम सब कुछ बन जायेंगेI 

 यदि आप हमारा साथ देना चाहते हैं तो आ जाइये I
 आपके आने से नये वर्ष की धूप में हमारा  पल पल चमक उठेगा I

नव वर्ष सबको शुभ हो I



धरती के इस शोर गुल को सुनकर मटकू बादल चंचल हो उठा और लगा झाँकने नीचे I वैसे तो आकाश की गोद में दुबका पड़ा था I जनवरी आने वाली थी-- .कड़ाके की ठण्ड --भला  उसे कहाँ बर्दाश्त !पर अब अपने पर काबू रखना उसके लिए मुश्किल ही हो गयाI  मटकता हुआ मुस्कराता हुआ  चल दिया नीचे ------

उस दिन बच्चे अपनी  ही धुन में थे किसी को उसकी तरफ देखने की फुरसत ही नहीं थी  I
                                                      







-यह काटा -काटी क्या कर रहे हो ? उकता कर मटकू ने पूछा I
- तुम्हें यह भी नहीं मालूम --!क्रिसमस गया और एक जनवरी को  नया साल आने वाला हैI हमें नए -नए कपड़े  पहनने होंगे , घर सजाना है ,चाकलेट लानी  है  .गुब्बारे भी फुलाने   हैं I बहुत सारे काम करने हैं  Iउपहार भी  सजाने हैं I बाद में तो मजा ही मजा है ---खायेंगे -पीयेंगे ,उछलेंगे -कूदेंगे और नाचेंगे Iबब्लू बोला I
-मैं  तुम्हारी कुछ मदद कर दूँ !
--हाँ --हाँ क्यों नहीं !उपहारों के पैकिट पर लाल पीले रिबिन बाँधदो I

-'सारी धरती खुशी से नाच रही है । ऐसे समय सलोनी   को क्या हो गया है !इसे  
   भी बुला लूँ I
'सलोनी --सलोनी --
-यह क्या!तुम रो रही हो!
-  'हाँ मटकू I     
-मगर   क्यों ?

'मनु मेरा छोटा भाई है । उसने मेरी गुड़िया तोड़ मरोड़ दी है ।  अब  मैं किसके साथ खेलूंगी । '
'क्या तुमने अपनी मम्मी से शिकायत की ?'

'हाँ ,जब मैंने उन्हें अपनी घायल गुड़िया को दिखाया तो मनु को डांटा भी नहीं । कहने लगीं --पागलों की तरह क्यों रोंती हो !दूसरी गुड़िया ला देंगे । मैं उस गुड़िया के सा
थ बहुत दिनों से रहती हूँ । उसके बिना मैं बहुत दुखी हो जाऊँगी मुझे उदास देखकर माँ भी मुझपर हंसती हैं और भाई अंगूठा दिखा -दिखाकर मुझे चिढ़ाता है । '

  मटकू सलोनी   का आंसुओं से भरा चेहरा अपने रुई से मुलायम हाथों में लेकर बोला  -

' सलोनी   बहन ,अपने लिए इतना मत रोओं वरना दूसरे तो हँसेंगे ही । '
'तुम भी तो रोते हो । कभी धीरे -धीरे ,कभी जोर से । लेकिन तुम पर कोई नहीं हँसता । सलोनी ने कहा  I            'यह तुमने कैसे जाना ?।

'जब रिमझिम बरसात होती है तो मैं समझ जाती हूँ तुम धीरे से रो रहे हो । जब
मूसलाधार पानी बरसता है तो तुम जोर से रो देते हो । परन्तु तुम्हारे आंसुओं की धार में नहाकर कोई खुश होता है तो कोई तुम्हारी तारीफ करता है । सलोनी   ने अपने दिल की बात कह दी ।
'तुम्हारा कह
ना एकदम ठीक है । परन्तु तुम्हारे और मेरे रोने में एक अन्तर है। तुम अपने लिये रोती हो मैं दूसरों के लिये रोता हूँ । तुम अपनी भलाई की बात सोचती हो मैं दूसरों के हित को ध्यान में रखता हूँ।

'तुम किस तरह से दूसरों का भला करते हो ?'

'
मेरे पानी बरसाने से सूखे पेड़ -पौधे हरे- भरे हो जाते हैं । । नदी ,तालाब में जल भरने से पशु पक्षी उसे पीकर

अपनी प्यास बुझाते हैं ।                                                     
मोर मुझे देखकर  नाचना शुरू करता है तो  नाचता ही  रहता है । मैं इन सबको प्रसन्न करने के लिये ही तो आंसू बहाता हूँ। '

'इससे तुम्हें क्या मिलाता है?'
'दूसरों को खुश होता देख मैं भी बहुत खुश होता हूँ । '

' मटकू  तुम तो दूसरों का बहुत ध्यान रखते हो । मैं तो अपने खिलौने किसी को नहीं छूने देती । कभी -कभी तो भइया की गेंद भी छीन लेती हूँ । '
'यह तो अच्छे बच्चों की पहचान नहीं है । '
-नए साल में मेरा तुमसे वायदा रहा --  मैं भी ऐसे काम करूंगी जिससे दूसरों को सुख मिले और एक अच्छी बच्ची बनूँगी I

सलोनी   की बातें सुनकर बादल  मुस्करा दिया I 

-चलो मेरे साथ, जरा उपहार रिबिन से सजा दो |
--उपहार के पैकिट तो बहुत छोटे हैं !
- कोई उपहार छोटा या बड़ा  नहीं होता यह तो प्यार की निशानी है I जिसे उपहार दिया जाता है इसका मतलब
 तुम उसे प्यार करते हो I

 

--तब तो मुझे भी तुमको उपहार देना चाहिए I
-मेरे लिए  सबसे बड़ा उपहार यही है  की तुम  हमेशा खिलखिलाते रहो और मिलजुलकर रहो I अच्छा साथियों, अब मैं  चला ----
बच्चे  एक  साथ चिल्लाये --

नया साल 




                                                                                                                                                                

शनिवार, 22 अक्तूबर 2011

दीवाली के रंग


दीपावली का दिव्य एवं पुनीत पर्व आप सबको शुभ हो !


प्यारी -प्यारी दिवाली 
मन को अच्छी लगने वाली 
फूलों से खिलते फूलों को 
हजार खुशियाँ लाये ।

बच्चों
 पिछले वर्ष की ही तो बात है ----
दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन का समय हो गया था। पर ब च्चे, फुलझड़ियाँ ,अनार छोड़ने में 



मस्त -- । तभी दादाजी की रौबदार आवाज सुनाई दी ----
-देव --दीक्षा --शिक्षा जल्दी आओ --मैं तुम सबको एक कहानी सुनाऊंगा ।

कहानी के नाम भागे बच्चे झटपट घर की ओर । हाथ मुंह धोकर पूजाघर में बड़ी शांति से कालीन पर बिछी सफेद चादर पर बैठ गये  । सामने चौकी पर लक्ष्मीजी कमल पर बैठी सबका मन मोह रही थीं । पास में गणेश जी हाथ में कलम  लिए हमारी और देख रहे थे जैसे कुछ कहना चाह रहे होंI

  बातूनी देव मुश्किल से पाँच वर्ष का था पर बाल की खाल निकलने में माहिर था। बड़ी उत्सुकता से बोला ----
-दादाजी लक्ष्मी जी कमल पर क्यों बैठी हैं ?
-कमल अच्छा भाग्य  (good luck) लाने वाला होता है  और लक्ष्मीजी 
  जिस घर में जाती है वहाँ बहुत सा रूपया -पैसा आ जाता है।इस तरह दोनों  के साथ रहने से भाग्य दुगुना चमकता है I 


दीक्षा को अपने भाई की बुद्धि पर बड़ा तरस आया और बोली -
--अरे बुद्धू !इतना भी नहीं जानता !इसीलिये तो हम लक्ष्मी जी की पूजा करेंगे।
-देखो  दीदी मुझे चि
ढ़ाओ मत ।
दोनों की नोकझोंक देख गणेशजी अपनी सूंढ़ हवा में लहराते हुए बोले ---बच्चों रुपया -पैसा तुम्हारे पास आजाये तो पढ़ाई-लिखाई मत भूल जाना वरना सच में बुद्धू रह जाओगे I
दीक्षा अपने दादाजी का मुँह ताकने लगी I

--हा !हा !देखा --तुमको इतनी सी बात नहीं मालूम--- तुम भी बुद्धू हो !देव ने अपनी बहन को अंगूठा दिखाया I


-कमल तो  फूलों में सबसे अच्छा है।-आपने तो हमारे बगीचे में इसे उगाया ही नहीं! देव की  लट्टू सी आँखें दादा जी की ओर घूम पड़ीं I  
-नन्हे बच्चे ,यह बगीचे में नहीं ,तालाब की कीचड़ में पैदा होता है।
-फिर तो इसे हम छुएंगे भी नहीं । दीक्षा ने मुँह बनाया।



-कीचड़ में पैदा होता हुए भी यह ऊपर उठा साफ -चमकदार रहता है।
-कमाल हो गया --गंदगी में पैदा होते हुए भी गन्दा नहीं।
हाँ !तुम्हें भी गंदगी में रहते हुए गन्दा नहीं होना है।
 

-दादा जी हम आपकी बात समझे नहीं।
-बात बिलकुल साफ है--- स्कूल में तुम्हें गंदा बच्चा भी मिल सकता है  ,जो झूठ बोलता होगा ,नाक- मुँह में उंगली देता होगा । तुमको उसके साथ रहकर भी बुरा नहीं बनना है I
- समझ गये दादा जी, हमें कमल की तरह  साफ -सुथरा बनना है --अन्दर से भी साफ -बाहर से भी साफ I तभी तो लक्ष्मी जी हमको पसंद करेंगी । बच्चे चहचहाने लगे।
-अब बातें बंद--। आँखें मीचकर लक्ष्मीजी की पूजा में ध्यान लगाओ।
कुछ पल ही गुजरे होंगे कि बच्चे  झप झपाने लगे अपनी  आँखें कि किसकी झोली में लक्ष्मी जी सबसे ज्यादा  रुपयों की बरसात करती हैं पर वह तो खाली ही रही I दूसरे ही पल उन्होंने एक -दूसरे को  कुछ इशारा किया और भाग खड़े हुए तीनों तीन दिशाओं में---- पटाखे जो छोड़ने थे-----

लेकिन ---पकड़े गए I
-कहाँ भागे --पहले बड़ों को प्रणाम कर उनसे आशीर्वाद लो और दरवाजे पर मिट्टी के दिये जलाओ ।
दीपक जलाते समय बच्चे  खुशी से  गाने लगे ---
दीप जलाकर खुशी मनाते
आई आज आह दिवाली ,
रात लगाकर काजल आई
फिर भी हुआ उजाला ,
घर  लगता ऐसा मानो
 पहनी हो दीपों की माला ।

प्रकाश से जगमगाती बच्चों की  दिवाली अभी अधूरी थी सो उसे पूरा करने को सरपट भागे -----पटाखे ,फुलझड़ियाँ  जो छोडनी थीं !



 दीपक 

 दीप प्रकाश देता है प्रकाश ज्ञान का प्रतीक है ।
-प्रकाश अन्धकार मिटाता है।
-ज्ञान हमारे अन्दर का अन्धकार(अज्ञान ) मिटाता है।

बिजली का बल्व 
-बिजली का लट्टू अन्धकार तो दूर करता है पर लक्ष्य नहीं बताता।
लक्ष्य --
दीपक की लौ सदैव ऊपर की ओर जलती है जो इशारा करती है ----हमेशा ऊपर की ओर उठते जाओ और ऊंचे आदर्शों को पाओ।







*  * * * * * *

शनिवार, 4 जून 2011

लंदन का गुलाब मास


गुलाब मास -जून /सुधा भार्गव
बच्चो
आजकल तो मिलने -जुलने ,खाने -पीने ,दौड़ने -भागने में यूं ही दिन छूँ -मंतर हो जाता होगा । मैं भी लन्दन में छुट्टियाँ मना रही हूं।
जून का महीना
  यहाँ जून, गुलाब का महीना(rose month ) कहलाता  है।




घर -घर लाल पीले .गुलाबी  खिल -खिल हँस रहे हैं ।लाल  छींटे वाले  नारंगी गुलाब ने तो मुझे चकित कर दिया । लगता है जैसे नारंगी  परी ने लाल घाघरा पहन रखा हो।मजे की बात तो यह है कि इनके साथ ज्यादा मेहनत  नहीं की जाती । मौसम की मेहरबानी से  झाड़ियाँ बड़े -बड़े गुलाबों से ढक जाती है।हवा में  उनकी  सुगंध घुल गयी है। मन करता है इनके पास बैठकर कहानी लिखूँ !
लो ---चमत्कार ---कहानी लिख  भी ली --

फूलों का राजा



सुनो ---

एक बिल्ली थी । प्यारी -प्यारी ,दूध सी सफेद ---हाथ लगाओ तो लगता  -
---मैली  हो जायेगी ।

उसे फूलों का राजा बहुत अच्छा लगता ।लाल-गुलाबी चमकदार-- मन को खुश करने वाली खुशबू से भरा हुआ  ।

 बिल्ली सुबह ही उसकी झाड़ी के नीचे आकर बैठ जाती ।घंटों बैठी रहती---। गुलाब की खुशबू से वहाँ की हवा महकती ---बिल्ली  जोर से साँस अन्दर  खींचती ताकि गुलाब की सुगंध ज्यादा से ज्यादा उसके अंगों  में बस जाये। इससे उसे ताजगी मिलती ,आराम मिलता।




एक दिन जोर से हवा चली। झोकों से गुलाब की टहनियां
झूम उठीं।उसकी पंखड़ियाँ
झर-झर---- बिल्ली पर गिरने लगीं

-आह !गुलाब राजा --तुम्हारी पंखड़ियां तो बड़ी ही  कोमल हैं ।इनकी छुअन से मुझे ऐसा लगा मानो माँ दुलार रही हो ।

-लेकिन तुम तो माँ होकर दो घंटे से यहाँ बैठी हो ।तुम्हारे बच्चे तो तुम्हारी राह देख रहे होंगे ।



-बच्चों की तो बात ही मत करो, बड़ा तंग करते हैं। मुझे भी उनपर गुस्सा आ जाता है।

-रे --रे  --बच्चों  पर गुस्सा --कभी नहीं --कभी नहीं ।ऐसा करो, उनके लिए फूल ले जाना ।मैं जहाँ भी रहता हूं वहाँ प्यार  और खुशियों की बरसात होती है ।




-तब तो आकाश से बूंदों के बदले गुलाब बरसने लगें तो कितने अच्छा- - -  हो ।सारी दुनिया खूबसूरत लगने लगे।लड़ाई -झगड़ा छोड़कर सब हिलमिलकर रहने लगें।

 बिल्ली ने गुलाब तोड़ने के लिए हाथ  बढ़ाया तो उसके काँटा चुभ गया ।सी --सी करते हाथ पीछे कर लिया और बुरा सा मुँह बनाया ।




-बस, एक काँटे के चुभने से घबरा गई। मैं तो हमेशा काँटों से ही घिरा रहता हूं।वे चाहे जब मुझे क़तर सकते हैं पर - - - मुसीबतों से क्या घबराना ।
-देखो तो- -  मेरे कितना खून निकल रहा है !तुम्हें मजाक की सूझी है।

-तुम मुझसे प्यार करती हो ?
-हाँ ---बहुत - - ।
-जब मुझसे प्यार करती हो --- मेरे काँटे तो अपनाने ही होंगे। अच्छाई
के साथ बुराई भी होती है

-एकाएक बिल्ली बेचैन हो उठी - - - ।
-बिल्ली बहना! तबियत तो ठीक है !
-बच्चों की याद आ रही है  चलूँ---मैं अपने प्यारे  बच्चों को बहुत डांट देती हूं। उन्हें प्यार से गले लगाकर ही मुझे चैन मिलेगा।

गुलाब ने बिल्ली को रोका नहीं। वह यह जानकर संतुष्ट था कि बहना का ह्रदय प्यार से भर गया ह। वह इसे बच्चों पर लुटाना चाहती है

गुलाब
-फूलों का राजा ।
-गुलाब की भाषा प्यार है।
-यह सच्चा मित्र है।सुख -दुःख में समान  खुशबू देता है।
-फूलों में सारी धरती हँसती नजर आती है




* * * * * *

बुधवार, 4 मई 2011

नई कहानी --गरीब का भाई

मई  मास  की नई कहानी




सुनो कहानी एक नई
मई मास में डाली डाली
झूल रहे, हरे  -रसीले
पीले -पीले आम ।


लाल -लाल गालों वाले                 
छोटे -छोटे  हाथ उठाकर
तुम्हें बुलाते प्यारे  बच्चों 
दोड़ो -आओ,खाओ आम।


तेज हवा
के झोंकों से
टप से गिर गये आम
जल्दी उठाओ ,पानी से धोलो

मीठे मिश्री से आम।

चूस -चूस कर गुठली फेंको
उनको सुलाओ माटी में
उग आएगा आम का पौधा
सुन्दर सा सुकुमार।


गरीब  का भाई /सुधा  भार्गव

गरीब फुलवा ने ऐसा ही किया । उसकी माँ को एक दिन  एक आम मिल गया |
देखते  ही वह उस पर पिल पड़ा । स्वाद ले- ले कर उसे चूसने लगा और गुठली  लापरवाही से झोंपड़ी के आगे डाल दी ।

दूसरे दिन सुबह वह  सोकर उठा और गुठली देखने बाहर आया पर उसे कहीं न दिखाई दी । असल में रात में पानी बरसने के कारण गुठली मिट्टी में दब गयी थी ।

कुछ दिनों बाद उसने फिर गुठली खोजी ,वह तो नहीं मिली पर उसकी जगह कोमल -कोमल पत्तों वाला नन्हा सा पौधा खड़ा मिला।

उसे देखकर फुलवा  मुस्करा दिया  और बोला --पौधे भाई ---पौधे भाई --घर के बाहर क्यों खड़े हो।चलो मेरे साथ अन्दर, मैं तुम्हारे साथ खेलूंगा ।

- धीरे से उठाना वरना मुझे चोट लग जायेगी ।धीमी आवाज आई।
-तुम मेरे भाई हो। तुम्हें  सावधानी से अन्दर ले जाकर एक गमले में रख दूँगा।

-थोड़े दिनों में मैं बड़ा हो जाऊँगा --गमला तो फिर मेरे लिए छोटा पड़ जायेगा |पौधा कमर मटकाकर बोला ।
-फिर मैं क्या करूँ ----
-तुमने मुझे अपना भाई बनाया है सो तुम्हारे साथ ही रहना पसंद करूंगा लेकिन घर के अन्दर नहीं ---बाहर।
-क्यों ?
-बड़े  होने पर मेरी जड़ें नीचे  गहराई तक चली जायेंगी लम्बाई-मोटाई में  मैं तुमसे बड़ा हो जाऊँगा । तबतो तुम्हारा आँगन भी छोटा पड़ने लगेगा।
फुलवा सिर खुजलाते हुए बोला --कह तो ठीक रहे हो पर तुम्हारे साथ रहूँगा कैसे !
-तुम रोज मेरे पास सुबह -शाम आना ,मेरी देखभाल करना मुझे पानी और खाद की भी जरूरत होगी ।
-क्यों ?
-जिस तरह तुम्हें भूख -प्यास लगती है उसी तरह मुझे भी लगती है ।
-तुम्हारा साथ मुझे बहुत अच्छा लगता  है ।  तुमसे मिलने सुबह -शाम जरूर आऊँगा ।

फुलवा की देखरेख में पौधा बड़ा होने लगा  ।फल -फूल और पत्तों से भरपूर आम का पौधा एक बड़ा पेड़ बन गया  ।



अब फुलवा उसकी देखभाल नहीं करता था बल्कि पेड़ फुलवा का ध्यान रखता था ।

फुलवा और उसकी माँ खूब आम खाते। जो बचते वे ग़रीब बच्चों में बाँट दिये जाते ताकि कोई आम के लिए न तरसे ।

एक दिन फुलवा बोला -पेड़ भाई .मैं तो  बहुत पढ़ना चाहता हूं पर इसके लिए पैसा नहीं है ।
-पैसा !पैसा तो तुम कमा सकते हो ।
-मैं --मैं तो बहुत छोटा हूं।
-छोटे नहीं--- अब बड़े  हो गये हो  । टोकरी में आम भरकर बाजार में बेच आओ। बस आ जायेगा पैसा  ।निकल आएगा फीस -किताब का खर्चा।
-तब तो मैं माँ को काम भी नहीं करने दूँगा । देख  लेना---  घर में रानी बनाकर रखूँगा उसे ।
-बस देखने शुरू कर दिये सपने । सपने सच करने के लिए कुछ करना भी पड़ता है  । पहले आम बेचने तो जाओ ।



बड़े -बड़े, रसीले आम देख खरीदारों ने फटाफट खरीद लिए ।पहली बार उसकी जेब में सिक्के खन -खन कर रहे थे।उनकी आवाज सुनकर वह हवा में उडा जा रहा था |

रास्ते से फुलवा ने खुशी -खुशी  फूलों की  एक माला खरीदी|
पेड़ भाई को उसने  माला पहनाई और कहा --तुम्हारे कारण ही मेरी   जेब में  आज सौ रूपये  हैं  । यह मै कभी भूल नहीं सकता ।
घर में वह फुर्ती से गया और चिल्लाया --
-माँ --माँ  --देखो तो --आम बेचकर मैं बहुत से रूपये लाया हूं ।

चकित होकर माँ अपने बेटे पर प्यार ही प्यार उड़ेलने लगी  । लेकिन वह अपने दूसरे बेटे को नहीं भूली । रोली चावल लेकर बाहर आई  । आम के पेड़ को तिलक लगाया ।
बोली --फुलवा ,मुझसे  वायदा करो -- पेड़ भाई की हमेशा रक्षा करोगे ।.वह हमारी भलाई करने वाला है।उसे काटकर -,तोड़कर कष्ट न पहुँचाना ।



माँ --मैं सब समय तुम्हारी बात याद रखूँगा  ।फुलवा ने अपने पेड़ भाई पर स्नेह से हाथ फेरा।
इतनी अच्छी माँ और भाई को पाकर पेड़ भाई  तो खुशी से झूम उठा । ऐसा झूमा -----   डालियाँ भी नाच उठीं । लाल.हरे -पीले -आम दोनों के चारों ओर बिछ गये।
कह रहे थे ---

प्यार के झोंकों से

टप से गिरे  हम                              v
लपलप  -लपलप                                     
भागम भाग -भाग
 

चूसो -खाओ आम
                     

भाग -भाग -भाग


आम
हमारा राष्ट्रीय फल 
-देवताओं का प्रिय भोजन  ।
-कवि कालीदास ने इसकी प्रशंसा में गीत गाये।
-ग्रीक राजा एलेक्जेंडर द ग्रेट और चीनी यात्री ह्येन त्सेंग (Hieun tsang)को यह फल बहुत स्वादिष्ट लगा ।
- बादशाह अकबर ने दरभंगा (बिहार )में १००,०००आम के   पेड़ लगवाये ।
-आमों में विटामिन ए ,सी .डी भरपूर मात्रा में पाया जाता है ।
चित्र -गूगल से साभार
समाप्त

गुरुवार, 31 मार्च 2011

सुनो हमारी -- बल्ले ----बल्ले


बल्ले ----बल्ले
सुनो हमारी / सुधा भार्गव



पढ़ने का मौसम भागा  रे भैया

छुट्टी का मौसम आया रे

खाओ पीओं , मौज उड़ाओ

कोई न आँख दिखाए रे
|

क्यों बच्चो !

ठीक कहा न !


अच्छा जरा बताओ तो ---
कौन -कौन कहाँ जा रहा है ?

उड़कर जायेगा या चलकर
पटरी पर दौड़ेगा या 
कार  दौड़ा येगा
I

देखो -देखो कौन जा रहा है !गुलाल बिखेरता ------




शनिवार, 12 फ़रवरी 2011

बालसाहित्य --कहानी


नन्हे मुन्नों ,नन्ही गुड़ियाँ

दुनिया भर में ' नये दोस्त बनाओ ' दिवस मनाया जा रहा है |तुम भी नये -नये  दोस्त बनाओ  I दोस्तों के साथ समय बिताने में कुछ दूसरा ही मजा आता हैI लड़ाई-झगड़े दोस्ती की मिठास को दुगुना कर देते हैं I

नीचे लिखी कहानी को पढ़कर मेरी बात पर तुम्हें जरूर विश्वास हो जायेगा I
*
बाल  कहानी  /     सुधा भार्गव


दोस्ती





एक शेर था !सकी गुफा में एक चूहा भी रहता था !शेर शिकार करने को जाता और चूहे को दाना लाता !शिकार से ज्यादा उसे दाना खोजने में मेहनत पड़ती I वह अक्सर चिड़ियों के घोंसलों के नीचे खड़ा हो जाता I 


 चिड़िया माँ बच्चे की चोंच से अपनी चोंच भिड़ाकर उसे दाना खिलाती !- दाने नीचे भी गिर जाते I शेर उनको ही उठा लेता !चूहे का वे भोजन बनते !दिन में चूहा शेर की पीठ पर उछल- कूद करता और- - - - - - - -
दोनों सैर करने को जाते |

 


जंगल के सारे जानवर इनकी दोस्ती को देखकर हैरान थे !एक दिन खरगोश बोला --                

चूहे
मियां जरा बचकर रहना !अपने से ज्यादा शक्तिवान की दोस्ती
अच्छी दुश्मनी ! चाहे जब
वह रौब गाँठ सकता है ,कमजोर को सता सकता है !--चूहा डर से सिकुड़ गया !

वह गुफा में पहुंचा !शेर से दूर रहकर जमीन पर बिखरा दाना खाने लगा I शेरने देखा -'-चूहा बहुत गंभीर है ,बोल भी नहीं रहा है !'         
-चूहे
राम ,हमसे तुम गुस्सा हो क्या !'चूहा चुप !


-किसी ने कुछ कह दिया क्या ! मुझे बताओ !उसे अभी हवा में उछाल देता हूँ !

' दूसरा क्या कहेगा ,तुम मुझे ही हवा में उछाल सकते हो !शक्तिवानों का विश्वास करना ठीक नहीं !'

' क्या कहा !मैं शक्तिवान !शक्तिवान तो तुम हो !तुम्हारे पिताम ने मेरे पितामह को शिकारी के चंगुल से बचाया था ! वे उसके जाल में फँस गए थे जाल को दांतों से कट --कट रके काट दिया गया I तीन पीढ़ियों से हमारी दोस्ती चली रही है !'


' कुछ भी कहो ,मैं तो तुम्हे छोड़कर जा रहा हूँ !'चूहा अड़ गया !

'
जाओ ,मैं तुम्हे रोकूंगा नहीं ,शेर हूं !शे कभी धोखा धडी का सहारा नहीं लेता !तभी तो वह शेर रहता है और उसे सारा जंगल अपना राजा मानता है I '

'तुम अपनी तरीफ कर रहे हो पर मुझ पर कोई असर नहीं होने वाला ,मैं जा रहा हूँ!'

'बार -बार धमकी क्यों दे रहे हो ,कहा जाओ-- - !पर याद रखना ,यदि मैं मुसीबत में फँस गया तो कौन बचायेगा !'


चूहा जाते -जाते ठिठक गया !चुपचाप दाना कुतर -कुतर कर खाने लगा कनखियों से शेर को देखा और धीमे से हँस पड़ा

(चित्र -गूगल

  से  साभार )
 * * * * * * *

दोस्ती  
एक अनोखा रिश्ता है |






 
दोस्त जीवन को गुलाब की खुशबू की तरह महका देता है  |

*