प्यारे बच्चों

कल सपने में देखा -मैं एक छोटी सी बच्ची बन गई हूं । तुम सब मेरा जन्मदिन मनाने आये हो । चारों ओर खुशियाँ बिखर पड़ी हैं ,टॉफियों की बरसात हो रही है । सुबह होते ही तुम में से कोई नहीं दिखाई दिया ।मुझे तो तुम्हारी याद सताने लगी ।

तुमसे मिलने के लिए मैंने बाल कुञ्ज के दरवाजे हमेशा के लिए खोल दिये हैं। यहाँ की सैर करते समय तुम्हारी मुलाकात खट्टी -मीठी ,नाटी -मोती ,बड़की -सयानी कहानियों से होगी । कभी तुम खिलखिला पड़ोगे , कभी कल्पना में उड़ते -उड़ते चन्द्रमा से टकरा जाओगे .कुछ की सुगंध से तुम अच्छे बच्चे बन जाओगे ।

जो कहानी तुम्हें अच्छी लगे उसे दूसरों को सुनाना मत भूलना और हाँ ---मुझे भी वह जरूर बताना ।
इन्तजार रहेगा ----! भूलना मत - -

सोमवार, 26 दिसंबर 2011

नया साल -- नई कहानी

नए वर्ष की चहल -पहल




                                                                                 





नए साल में  बच्चों की दुनिया में बच्चों का और बड़ों का स्वागत हैI हम इसमें पूरे एक  वर्ष रहेंगे I न कोई डर होगा न कोई चिंता I बस हँसेंगे -हंसाएंगे प्रीत   के फूल खिलाएंगे I.अपने हिस्से की रोटी दूसरों को खिलाएंगे I जिसका कोई न होगा उसके हम सब कुछ बन जायेंगेI 

 यदि आप हमारा साथ देना चाहते हैं तो आ जाइये I
 आपके आने से नये वर्ष की धूप में हमारा  पल पल चमक उठेगा I

नव वर्ष सबको शुभ हो I



धरती के इस शोर गुल को सुनकर मटकू बादल चंचल हो उठा और लगा झाँकने नीचे I वैसे तो आकाश की गोद में दुबका पड़ा था I जनवरी आने वाली थी-- .कड़ाके की ठण्ड --भला  उसे कहाँ बर्दाश्त !पर अब अपने पर काबू रखना उसके लिए मुश्किल ही हो गयाI  मटकता हुआ मुस्कराता हुआ  चल दिया नीचे ------

उस दिन बच्चे अपनी  ही धुन में थे किसी को उसकी तरफ देखने की फुरसत ही नहीं थी  I
                                                      







-यह काटा -काटी क्या कर रहे हो ? उकता कर मटकू ने पूछा I
- तुम्हें यह भी नहीं मालूम --!क्रिसमस गया और एक जनवरी को  नया साल आने वाला हैI हमें नए -नए कपड़े  पहनने होंगे , घर सजाना है ,चाकलेट लानी  है  .गुब्बारे भी फुलाने   हैं I बहुत सारे काम करने हैं  Iउपहार भी  सजाने हैं I बाद में तो मजा ही मजा है ---खायेंगे -पीयेंगे ,उछलेंगे -कूदेंगे और नाचेंगे Iबब्लू बोला I
-मैं  तुम्हारी कुछ मदद कर दूँ !
--हाँ --हाँ क्यों नहीं !उपहारों के पैकिट पर लाल पीले रिबिन बाँधदो I

-'सारी धरती खुशी से नाच रही है । ऐसे समय सलोनी   को क्या हो गया है !इसे  
   भी बुला लूँ I
'सलोनी --सलोनी --
-यह क्या!तुम रो रही हो!
-  'हाँ मटकू I     
-मगर   क्यों ?

'मनु मेरा छोटा भाई है । उसने मेरी गुड़िया तोड़ मरोड़ दी है ।  अब  मैं किसके साथ खेलूंगी । '
'क्या तुमने अपनी मम्मी से शिकायत की ?'

'हाँ ,जब मैंने उन्हें अपनी घायल गुड़िया को दिखाया तो मनु को डांटा भी नहीं । कहने लगीं --पागलों की तरह क्यों रोंती हो !दूसरी गुड़िया ला देंगे । मैं उस गुड़िया के सा
थ बहुत दिनों से रहती हूँ । उसके बिना मैं बहुत दुखी हो जाऊँगी मुझे उदास देखकर माँ भी मुझपर हंसती हैं और भाई अंगूठा दिखा -दिखाकर मुझे चिढ़ाता है । '

  मटकू सलोनी   का आंसुओं से भरा चेहरा अपने रुई से मुलायम हाथों में लेकर बोला  -

' सलोनी   बहन ,अपने लिए इतना मत रोओं वरना दूसरे तो हँसेंगे ही । '
'तुम भी तो रोते हो । कभी धीरे -धीरे ,कभी जोर से । लेकिन तुम पर कोई नहीं हँसता । सलोनी ने कहा  I            'यह तुमने कैसे जाना ?।

'जब रिमझिम बरसात होती है तो मैं समझ जाती हूँ तुम धीरे से रो रहे हो । जब
मूसलाधार पानी बरसता है तो तुम जोर से रो देते हो । परन्तु तुम्हारे आंसुओं की धार में नहाकर कोई खुश होता है तो कोई तुम्हारी तारीफ करता है । सलोनी   ने अपने दिल की बात कह दी ।
'तुम्हारा कह
ना एकदम ठीक है । परन्तु तुम्हारे और मेरे रोने में एक अन्तर है। तुम अपने लिये रोती हो मैं दूसरों के लिये रोता हूँ । तुम अपनी भलाई की बात सोचती हो मैं दूसरों के हित को ध्यान में रखता हूँ।

'तुम किस तरह से दूसरों का भला करते हो ?'

'
मेरे पानी बरसाने से सूखे पेड़ -पौधे हरे- भरे हो जाते हैं । । नदी ,तालाब में जल भरने से पशु पक्षी उसे पीकर

अपनी प्यास बुझाते हैं ।                                                     
मोर मुझे देखकर  नाचना शुरू करता है तो  नाचता ही  रहता है । मैं इन सबको प्रसन्न करने के लिये ही तो आंसू बहाता हूँ। '

'इससे तुम्हें क्या मिलाता है?'
'दूसरों को खुश होता देख मैं भी बहुत खुश होता हूँ । '

' मटकू  तुम तो दूसरों का बहुत ध्यान रखते हो । मैं तो अपने खिलौने किसी को नहीं छूने देती । कभी -कभी तो भइया की गेंद भी छीन लेती हूँ । '
'यह तो अच्छे बच्चों की पहचान नहीं है । '
-नए साल में मेरा तुमसे वायदा रहा --  मैं भी ऐसे काम करूंगी जिससे दूसरों को सुख मिले और एक अच्छी बच्ची बनूँगी I

सलोनी   की बातें सुनकर बादल  मुस्करा दिया I 

-चलो मेरे साथ, जरा उपहार रिबिन से सजा दो |
--उपहार के पैकिट तो बहुत छोटे हैं !
- कोई उपहार छोटा या बड़ा  नहीं होता यह तो प्यार की निशानी है I जिसे उपहार दिया जाता है इसका मतलब
 तुम उसे प्यार करते हो I

 

--तब तो मुझे भी तुमको उपहार देना चाहिए I
-मेरे लिए  सबसे बड़ा उपहार यही है  की तुम  हमेशा खिलखिलाते रहो और मिलजुलकर रहो I अच्छा साथियों, अब मैं  चला ----
बच्चे  एक  साथ चिल्लाये --

नया साल 




                                                                                                                                                                

8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुन्दर पठनीय पोस्ट… आपको भी नव वर्ष की बहुत बहुत शुभकामनाएं !

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  2. bachchon ke liye aapne bahut hee akarshak prastuti pesh kiya,man ko achchha lagaa,chahtaa hoon ki har lekhak bachchon ke liye kuchh karnaa chahiye.

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  3. bchpn bhut sundr hota hai bchche to bde ho jate hain pr bdon ka bchcha bnna bda mushkil hota hai kash sb aise hi bchchon jaise nishchhl ho jyaen
    bhut 2 shubhkamnayen

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  4. अशोक जी

    सादर नमस्कार

    आपने मेरी प्रस्तुति को सराहाया I बहुत अच्छा लगाI अब हम पच्चीस साल के तो हो नहीं सकते पर मन से तो पाँच साल के भी हो सकते हैं Iअब देखिये न -मैंने आपके रिमझिम ब्लॉग पर सर्दी नानी पढ़ी Iपढ़ते -गुनगुनाते बोल बदल गये और मैं बचपन की तलहटी में जा पहुँची --

    एक नन्ही सी बालिका गुड़िया को बगल में दबाये गाया करती थी --

    मेरी गुड़िया पड़ी बीमार

    डाक्टर देखो भली प्रकार

    कल था बरसा छमछम पानी

    उसमें भीगी गुड़िया रानी

    ओहो इसको तेज बुखार

    १०० से ऊपर डिग्री चार

    ------------------------- I
    शायद आपका बचपन भी खिलखिला रहा है --|

    सुधा भार्गव

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  5. सम्मान्या सुधा जी,
    आपकी इस मनोरम प्रस्तुति से ह्रदय प्रसन्न हो गया.
    कृपया धन्यवाद स्वीकार करें.

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  6. मित्रगण
    बहुमूल्य टिप्पणियों के लिए शुक्रिया ।

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