प्यारे बच्चों

कल सपने में देखा -मैं एक छोटी सी बच्ची बन गई हूं । तुम सब मेरा जन्मदिन मनाने आये हो । चारों ओर खुशियाँ बिखर पड़ी हैं ,टॉफियों की बरसात हो रही है । सुबह होते ही तुम में से कोई नहीं दिखाई दिया ।मुझे तो तुम्हारी याद सताने लगी ।

तुमसे मिलने के लिए मैंने बाल कुञ्ज के दरवाजे हमेशा के लिए खोल दिये हैं। यहाँ की सैर करते समय तुम्हारी मुलाकात खट्टी -मीठी ,नाटी -मोती ,बड़की -सयानी कहानियों से होगी । कभी तुम खिलखिला पड़ोगे , कभी कल्पना में उड़ते -उड़ते चन्द्रमा से टकरा जाओगे .कुछ की सुगंध से तुम अच्छे बच्चे बन जाओगे ।

जो कहानी तुम्हें अच्छी लगे उसे दूसरों को सुनाना मत भूलना और हाँ ---मुझे भी वह जरूर बताना ।
इन्तजार रहेगा ----! भूलना मत - -

शनिवार, 22 अक्तूबर 2016

ई बुक 1-मनोवैज्ञानिक बाल कहानियाँ

अंतरजाल पर मेरी प्रथम प्रकाशित ई बुक 
उलझन भरा संसार 
यह मेरा प्रथम प्रयास है। अपनी खुशी आपके साथ साझा करने में खुशी हो रही  है।  यह पुस्तक बाल मनोविज्ञान  से संबन्धित  है।  इसमें कुल मिलाकर 10 कहानियाँ है। जो यदा कदा विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। 
लिंक है 

pothi.com/pothi/book/ebook-sudha-bhargava-uljhan-bhara-sansar