प्यारे बच्चों

कल सपने में देखा -मैं एक छोटी सी बच्ची बन गई हूं । तुम सब मेरा जन्मदिन मनाने आये हो । चारों ओर खुशियाँ बिखर पड़ी हैं ,टॉफियों की बरसात हो रही है । सुबह होते ही तुम में से कोई नहीं दिखाई दिया ।मुझे तो तुम्हारी याद सताने लगी ।

तुमसे मिलने के लिए मैंने बाल कुञ्ज के दरवाजे हमेशा के लिए खोल दिये हैं। यहाँ की सैर करते समय तुम्हारी मुलाकात खट्टी -मीठी ,नाटी -मोती ,बड़की -सयानी कहानियों से होगी । कभी तुम खिलखिला पड़ोगे , कभी कल्पना में उड़ते -उड़ते चन्द्रमा से टकरा जाओगे .कुछ की सुगंध से तुम अच्छे बच्चे बन जाओगे ।

जो कहानी तुम्हें अच्छी लगे उसे दूसरों को सुनाना मत भूलना और हाँ ---मुझे भी वह जरूर बताना ।
इन्तजार रहेगा ----! भूलना मत - -

मंगलवार, 11 अप्रैल 2017

छटी ई बुक



बाल कहानी परिवार
सुधा भार्गव                                                                         अप्रैल-2017 



पारिवारिक गठबंधन को मजबूत बनाते हुए काल्पनिक पात्र  मौसी ने अपने प्यार की मिश्री घोलकर  एक हँसते खिलखिलाते अंदाज में इस पुस्तक की कहानियाँ बच्चों को सुनाई हैं। 
इस पुस्तक में कुल 132 पृष्ठ हैं। 100 पेज तो आप मौसी  के मटके पर  क्लिक करते ही पढ़  सकेंगे । बताइएगा कैसी लगीं?