कुछ दिनों पूर्व मुझे 'चाणक्य वार्ता' अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका का बाल
साहित्य विशेषांक मिला।पाकर बहुत हर्ष हुआ। 'चाणक्य वार्ता' ने
अपने नवीन 'बाल साहित्य विशेषांक' के जरिए यह सच कर दिखाया है कि जैसे आचार्य चाणक्य ने एक
बालक को सम्राट के रूप में गढ़ा था, वैसे
ही यह पत्रिका अपनी श्रेष्ठ रचनाओं के माध्यम से बच्चों के व्यक्तित्व को निखारने
का कार्य कर रही है।
125 लेखकों की कलम से निकला यह अंक हिंदी
राजभाषा के गौरव को अंतरराष्ट्रीय पटल पर बच्चों के बीच ले जाने का एक सफल प्रयास
है। गुणवत्तापूर्ण कागज़ और जीवंत चित्रों के साथ यह विशेषांक हर घर की लाइब्रेरी
में होना चाहिए
"इस विशेषांक की सफलता के पीछे अतिथि संपादक चेन्नई निवासी रोचिका शर्मा महोदया की अनवरत बाल-साहित्य साधना और अटूट समर्पण है। उन्होंने दिन-रात एक कर जिस प्रकार रचनाओं को तराशा है, वह प्रशंसनीय है; उनके इस महत्वपूर्ण योगदान के लिए सप्रेम आभार।साथ ही संपादक डॉ अमित जैन व उनकी पूरी टीम का धन्यवाद । इस विशेषांक के वरिष्ठ रचनाकारों को बहुत -बहुत बधाई।
इस विशेषांक में मेरी लघुकथा को भी स्थान मिला है

