प्यारे बच्चों

कल सपने में देखा -मैं एक छोटी सी बच्ची बन गई हूं । तुम सब मेरा जन्मदिन मनाने आये हो । चारों ओर खुशियाँ बिखर पड़ी हैं ,टॉफियों की बरसात हो रही है । सुबह होते ही तुम में से कोई नहीं दिखाई दिया ।मुझे तो तुम्हारी याद सताने लगी ।

तुमसे मिलने के लिए मैंने बाल कुञ्ज के दरवाजे हमेशा के लिए खोल दिये हैं। यहाँ की सैर करते समय तुम्हारी मुलाकात खट्टी -मीठी ,नाटी -मोती ,बड़की -सयानी कहानियों से होगी । कभी तुम खिलखिला पड़ोगे , कभी कल्पना में उड़ते -उड़ते चन्द्रमा से टकरा जाओगे .कुछ की सुगंध से तुम अच्छे बच्चे बन जाओगे ।

जो कहानी तुम्हें अच्छी लगे उसे दूसरों को सुनाना मत भूलना और हाँ ---मुझे भी वह जरूर बताना ।
इन्तजार रहेगा ----! भूलना मत - -

मंगलवार, 2 जून 2026

देवपुत्र में प्रकाशित कहानी -विश्रामधाम

मेरी बाल कहानी 

   बाल पत्रिका देवपुत्र -जून अंक 2026 में मेरी कहानी विश्राम धाम प्रकाशित हुई है। जिसमें एक बालक राजा की अक्ल ठिकाने लगा देता है और वह उसको अपना गुरु मान  लेता है।अगर हो सके तो इस गुरू से जरूर मिलिए। 
हँसते- हँसते  कहानी पढ़िये 
 विश्राम धाम