प्यारे बच्चों

कल सपने में देखा -मैं एक छोटी सी बच्ची बन गई हूं । तुम सब मेरा जन्मदिन मनाने आये हो । चारों ओर खुशियाँ बिखर पड़ी हैं ,टॉफियों की बरसात हो रही है । सुबह होते ही तुम में से कोई नहीं दिखाई दिया ।मुझे तो तुम्हारी याद सताने लगी ।

तुमसे मिलने के लिए मैंने बाल कुञ्ज के दरवाजे हमेशा के लिए खोल दिये हैं। यहाँ की सैर करते समय तुम्हारी मुलाकात खट्टी -मीठी ,नाटी -मोती ,बड़की -सयानी कहानियों से होगी । कभी तुम खिलखिला पड़ोगे , कभी कल्पना में उड़ते -उड़ते चन्द्रमा से टकरा जाओगे .कुछ की सुगंध से तुम अच्छे बच्चे बन जाओगे ।

जो कहानी तुम्हें अच्छी लगे उसे दूसरों को सुनाना मत भूलना और हाँ ---मुझे भी वह जरूर बताना ।
इन्तजार रहेगा ----! भूलना मत - -

सोमवार, 13 अप्रैल 2026

बाल प्रहरी त्रैमासिक पत्रिका में प्रकाशित

                           आक्सीजन की लूटमार

सुधा भार्गव 

बच्चों की त्रैमासिकपत्रिका बाल प्रहरी का अक 2000 26 ka Mela. बहुत खुशी हुई।। समस्त रचनाकारों को बहुत बधाई और उदय के रोल जी तथा उनकीपुर जिनके कारण अनेक कहानियां और किताबें पढ़ने कोमली ismein meri bhi ismein meri bhi ek kahani prakashitl इसमें मेरी भीएक कहानी जिसका नाम है ऑक्सीजन की लटमा











        लव के पापा  के पास एक हेलीकॉप्टर था जो घर के पिछवाड़े बड़े से मैदान में खड़ा  रहता था।  लव अक्सर  उसे ललचाई निगाहों से देखता । एक दिन वह अपने ख्यालों की पतंग उड़ाने में लगा था  – ‘काश मैं जल्दी बड़ा हो जाऊँ! चुपचाप इसे उड़ाते हुए बादलों में छिप जाऊँ। माँ ढूँढती आये। मुझे पुकारे ---- बेटा तू कहाँ है ?मैं बादलों से झांकता कहूँगा - मां मैं यहाँ हूँ। मेरी भोली माँ चकित हो जाएगी। इस आँख मिचौनी में कितने मजा आएगा।”वह अपनी कल्पना पर खुद ही झूम उठा। तभी पापा की आवाज सुनाई दी  –अरे लव !तुम कहाँ हो!“चलो ...आकाश की सैर करने चलें।“ 

       लव की तो बिना कहे ही  इच्छा पूरी हो रही थी । उसका दिल बल्लियों उछलने लगा। पापा ने रिमोट दबाया । खुल जा सिमसिम … हेलीकॉप्टर  के दरवाजे खुद खुल गए। बैठते ही लव को तो   लगा जैसे वह पुष्पक विमान में बैठा हो । नीचे देखा तो उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं!बहुमंजिलें इमारतें  चुहिया सी दीख रही थीं।कारें  चींटियों की तरह रेंग रही थीं।

  उड़ते हुये वे एक ऐसे टापू पर पहुंचे जहां सब भारी-भारी  मास्क लगाए हुए थे।आधे से ज्यादा चेहरा मास्क से ही ढका हुआ था। उन्हें देख  लव  का  तो माथा ही  चकरा गया।  जैसे ही वे कार से उतरे  ,बशीरा और रेमी  दो नवयुवकों  ने उनका स्वागत किया और उन्हें  एक -एक मास्क पकड़ा दिया। 

        “इतना भारी !हेलमैट से भी  तगड़ा !मेरा तो हाथ ही टूट जाएगा। !” लव तुनक उठा। 

       “इस  आक्सीजन मास्क को जल्दी से अपनी नाक पर बैठा  लो। वरना कुछ ही देर में सांस लेने को छटपटाने लगोगे।“ रेमी ने चेताया। 

       “ यहाँ  हवा में आक्सीजन नहीं  है क्या  !”

“नाम के बराबर! तभी तो मास्क खरीद कर लगाने पड़ते हैं।”

       

       “हद हो गई !अब तक तो पानी ही बोतल में बंद   था ,हवा भी मास्क में कैद हो गई।”लव के पापा बड़बड़ाए। 

             “साहब, ऑक्सीजन की बोतलें तो सोने के सिक्कों के दाम  बिक रही हैं । गरीबों के लिए तो यह टापू नरक है नरक ।“

 “

        “देखो ….देखो । वे तो  ऑक्सीजन सिलेंडर  अपने साथ लेकर घूम रहे  हैं। इन्हें तो मेरी तरह से सुबह-सुबह ना उठने की जरूरत  न बगीचे में जाकर घूमने की जरूरत ।“लव  हैरान!

      “बेटा ऐसा ना कहो !हम तो बगीचे की कुदरती  ताजी हवा को तरस रहे हैं। ।ये बुजुर्ग हैं।   आए दिन बीमार रहते हैं।इनको ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है।” बशीरा बोला।

        “यहाँ तो कोई बच्चा ही नहीं देखाई दे रहा !दोस्त किसे बनाऊँगा ?”लव ने चारों तरफ आँखें घुमाईं।“

       “ वे बाहर खेलने की  बजाय घरों में बंद रहते हैं। “

        “पढ़ने भी नहीं जाते!” 

         “वे क्या खाकर पढ़ने जाएंगे । खाली पेट  मास्क के लिए पैसा कहाँ से लाए? केवल धनिकों  के बच्चे ही स्कूल में नजर आते हैं।“

        “ ये धन के राजा गरीबों के लिए कुछ नहीं सोचते!”लव के पापा हैरान थे। 

       “उनका पेट तो  दिनोंदिन बड़ा होता जा रहा है। कुछ  ने मास्क फैक्ट्री लगा ली है। मास्क के दाम बढ़ाते ही जा रहे हैं। सबको अपनी मुट्ठी में कर रखा है। जरा भी कोई उनके खिलाफ गया—बातों ही बातों में  उसका मास्क उतार कर दूर फेंक देते है lजब तक   वह हाँफता हुआ  मास्क  लेने जाय तब तक उसका आधा दम तो निकला ही समझो। । हर पल ज़िंदगी से खिलवाड़!”

     “उफ बड़े  दुष्ट है । मुझे जरा उनके पास ले चलो । सबकी अक्ल ठिकाने लगा दूंगा। मालूम है मैं कर्राटे  चॅम्पियन हूँ।“लव ज्वालामुखी सा फूट पड़ा।   

“न बेटा ,अनजान जगह में किसी से दुश्मनी मोल लेना ठीक नहीं।“पापा ने उसे शांत करने की कोशिश की।लेकिन लव अंदर ही अंदर उबल रहा था। 

     “यह सब एक दिन में तो हुआ नहीं होगा!” पापा का  व्यथित हृदय बोल उठा। ।  

     “आप ठीक कह रहे हो साहब। एक दिन था जब  इस टापू पर घने हरे -भरे पेड़ हमारी रक्षा के लिए सीना  ताने  खड़े रहते थे। वे न कभी आंधी- तूफान से डरे न सर्दी- गर्मी से घबराए।  लेकिन एक तरफ आबादी बढ़ी तो दूसरी ओर फैक्टरी लगने लगीं । बस  सफाचट कर दिए जंगल । हमने हरा सोना  खो दिया।  हमारी जिंदगी आक्सीजन भी रूठ गई।” उसकी आवाज भर्रा उठी। 

    “सम्पन्न घरों में तो आक्सीजन के गोदाम के गोदाम भरे हुये हैं।व्यापारियों ने अपना पूरे  घर में ऑक्सीजन का पाइप डलवा रखा है।और तो और---टापू से ऑक्सीजन के सिलेंडर चोरी-छुपे मंगल ग्रह भेजे जा रहे हैं।”रेमी के स्वर में कड़वाहट थी। 

     “ पापा  यह कैसे हो सकता है? मंगल ग्रह पर तो  रहना तो  कोई आसान नहीं !"

    "बेटा, कुछ लोग बहुत धनवान हैं। वे हर हालत में मंगल ग्रह पर बस्तियां बसाकर  रहना  चाहते हैं। लेकिन  सांस लेने के लिए वहाँ ऑक्सीजन नहीं । इसलिए यहां से ऑक्सीजन चोरी छिपे भेजी जा रही है।"

    “आक्सीजन ले जाने वालों को  तो तुरंत शूट कर देना चाहिए।“ 

“शूट तो तब करोगे जब वे दिखाई दें।  यह काम तो रोबॉट्स से लिया जाता है। एक खतम तो दस पैदा। कभी सोचा भी न था  कि  इंसान रोबॉट्स का दुरुपयोग करके ,इंसान और प्रकृति के साथ इतना क्रूर व्यवहार करेगा।”रेमी ने आह भरी।   

       लव के पापा घबराने वाले नहीं थे। उन्होंने  तय कर लिया कि वे ऑक्सीजन के अकानून कारोबार को बंद करवाएंगे।अपने साथियों की एक टीम बनाई और  जान ख़तरे में डालकर  पुलिस को इसकी सूचना  दी।अमीरजादों को जेल की हवा खानी पड़ी। वहां के लोग उनका लोहा मान गए। उस टीम के कहने पर टापू के लोगों जी जान  से घर बाहर  पेड़ लगाने में लग गए।  जल्दी ही टापू का भूगोल बदल गया। चारों तरफ हरियाली ही हरियाली दिखाई देने लगी। उसके कारणऑक्सीजन तो हवा में ऐसी घुली कि मुरदों में भी जान आ गई।  

         लव  और उसके पापा  जिंदगीभर इस टापू को न भूले । जहां कहीं भी जाते आक्सीजन मास्क का किस्सा बताना न भूलते। सुनने वाले को भी पेड़ लगाने की धुन सवार हो जाती जिससे कार्बन राक्षस को उन्हें सताने की हिम्मत न पड़े।

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