प्यारे बच्चों

कल सपने में देखा -मैं एक छोटी सी बच्ची बन गई हूं । तुम सब मेरा जन्मदिन मनाने आये हो । चारों ओर खुशियाँ बिखर पड़ी हैं ,टॉफियों की बरसात हो रही है । सुबह होते ही तुम में से कोई नहीं दिखाई दिया ।मुझे तो तुम्हारी याद सताने लगी ।

तुमसे मिलने के लिए मैंने बाल कुञ्ज के दरवाजे हमेशा के लिए खोल दिये हैं। यहाँ की सैर करते समय तुम्हारी मुलाकात खट्टी -मीठी ,नाटी -मोती ,बड़की -सयानी कहानियों से होगी । कभी तुम खिलखिला पड़ोगे , कभी कल्पना में उड़ते -उड़ते चन्द्रमा से टकरा जाओगे .कुछ की सुगंध से तुम अच्छे बच्चे बन जाओगे ।

जो कहानी तुम्हें अच्छी लगे उसे दूसरों को सुनाना मत भूलना और हाँ ---मुझे भी वह जरूर बताना ।
इन्तजार रहेगा ----! भूलना मत - -

शुक्रवार, 12 जून 2020

कोरोना आया लॉक डाउन लाया

प्यारे बच्चो 
उत्सवों के आकाश के नीचे  ख़ुशी ख़ुशी हम घूम रहे थे कि न जाने कहाँ से कोरोना महामारी आन  धमकी। चंद  दिनों में बस फिर तो हमारी लाइफ स्टाइल ही बदल गई। सोचने का तरीका भी बदल गया। और बदल गई सारी  दुनिया।   

कोरोना आया लॉक डाउन लाया


बुरा हुआ--- बहुत ही बुरा हुआ
पर कुछ -कुछ अच्छा भी हुआ
अच्छा ही नहीं बहुत अच्छा हुआ
यह हमें बहुत कुछ सिखा रहा है
हम वह सब सीख भी  रहे हैं 
और बहुत कुछ कर भी रहे हैं

      अब मुझे  ही देख लो --घर में तीन महीने से  एक तरह से बंद ही हूँ ।न पहले की तरह सैर सपाटे ,न दोस्तों से गले में हाथ डाल  गप्प बाजी न जन्म पार्टी।पर एक बात बहुत अच्छी हुई -मुझे बहुत सारी कहानियां लिखने का समय मिल गया ।हाँ याद आया तुम्हारे साथ भी तो कुछ ऐसा ही घट रहा होगा ।  तुम्हारे तो स्कूल भी बंद हैं ।फिर तो समय ही समय। आशा है तुमने भी जरूर कोई नया काम शुरू किया होगा और बहुत सी बातें सीखी होंगी ।
      वैसे मुझे समाचार पत्रों को पढ़ने से और दूरदर्शन के परदे पर नजर डालने पर पता लग जाता है कि  किस तरह तुम समय का सदुपयोग कर रहे हो ?इससे मुझे बहुत खुशी मिलती है।
     मैं भी सोच रही हूँ तुम्हें अपनी लिखी एक कहानी सुना ही डालूँ ।हूँ --लगता है मुझे कुछ समय लगेगा ।बस कुछ पल दे दो ।
सुधा दी

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